Skip to main content

Posts

Showing posts from December, 2023

संप्रेषण प्रक्रिया

 संप्रेषण प्रक्रिया क्या है? संप्रेषण प्रक्रिया में संप्रेषक के साथ-साथ संप्रेषण के माध्यम और प्रापक या लक्षित समूह की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यदि इनमें परिवर्तन होता है तो संप्रेषण की प्रक्रिया में भी परिवर्तन हो जाता है। संप्रेषण प्रक्रिया में संप्रेषक अपना संदेश संचार माध्यम या मार्ग द्वारा प्रापक तक पहुँचाता है। अर्थात्‌ यहाँ चार तत्व महत्वपूर्ण है- संप्रेषक, संदेश, माध्यम और प्रापक। संप्रेषण प्रक्रिया के अध्ययन और विकास के साथ इसके अन्य तत्व भी सामने आए जिनकी संप्रेषण में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अब संप्रेषण की प्रक्रिया तभी पूर्ण समझी जाती है जब उसकी प्रतिक्रिया या प्रतिपुष्टि (फीड बैक) प्रापक के द्वारा प्राप्त हो जाती है। संप्रेषण में संप्रेषक और प्रापक में समता भी होनी चाहिए, क्योंकि विषमता की स्थिति में संप्रेषण अवरुद्ध हो जाता है। दोनों के बीच समता इसलिए जरूरी है क्योंकि माध्यमों में हो रहे बहु-मुखी परिवर्तनों के कारण अब संप्रेषक संदेश की सीधी अभिव्यक्ति के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक तथा भाषाई प्रतीकों या चिह्नों का कूट भी बनाता है जिसे प्रापक को डिकोड कर संदेश ग्रह...

संप्रेषण मॉडल

 संप्रेषण मॉडल संप्रेषण पर अधिकतर पश्चिमी विचारकों ने ही अपना मत रखा है, भारतीय चिंतन परम्परा में इसका अभाव दिखाई देता है। पश्चिमी विद्वानों के प्रमुख संप्रेषण मॉडल निम्नलिखित है- 1. अरस्तू का संप्रेषण मॉडल, 2. मर्फी का संप्रेषण मॉडल, 3. लॉसवेल का संप्रेषण मॉडल, 4. शैनन और वीवर का संप्रेषण मॉडल, 5. शैरम का संप्रेषण मॉडल, 6. बर्लो का संप्रेषण मॉडल, 7. हेलिकल का संप्रेषण मॉडल, 8. थिल एवं बोवी का संप्रेषण मॉडल, 9. लेसिकर, पेटाइट एवं फ्लैटले मॉडल संप्रेषण के प्रमुख मॉडल 1. अरस्तू का संप्रेषण मॉडल (Aristotle Model of Communication) अरस्तू संप्रेषण मॉडल पर विचार करने वाले पहले व्यक्ति थे। अरस्तू संप्रेषण के लिए 3 तत्वों को महत्वपूर्ण मानते हैं- प्रेषक, संदेश और प्राप्तकर्ता (प्रापक)। लेकिन अरस्तू अपने मॉडल में प्रेषक को ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं। अरस्तू के मॉडल के अनुसार, प्रेषक (स्पीकर) संप्रेषण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह संप्रेषण का पूरा प्रभार अपने कंधों पर लेता है। प्रेषक पहले एक ऐसी सामग्री तैयार करता है, जिससे वह अपने विचारों से श्रोताओं या प्राप्तकर्ताओं को प्रभावित ...

हिंदी: प्रत्यायन कौशल इकाई: 1 संप्रेषण की अवधारण और महत्त्व

  संप्रेषण की अवधारणा मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसे अपने विचार और भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए संप्रेषण पर निर्भय रहना पड़ता है। दूसरे शब्दों में संप्रेषण मनुष्य की अनिवार्य आवश्यकता और उसके  सामाजिक जीवन का आधार भी है। सामाजिक व्यवहार के लिए मनुष्य को एक दूसरे से संवाद स्थापित करना पड़ता है इसलिए संप्रेषण द्वारा ही मानव समाज की संचालन प्रक्रिया संभव बनती है। इसके अभाव में मानव समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। इसके बिना किसी भी प्रकार के समाज का निर्माण संभव नहीं। संप्रेषण का प्रारंभ मानव जीवन के आविर्भाव के साथ होता है और जीवन प्रयत्न संप्रेषण का महत्त्व बना रहता है। संप्रेषण मनुष्यों तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसका इतिहास इससे भी पुराना है। पशु-पक्षी आदि अपनी आवश्यकता अनुसार संप्रेषण करते रहे हैं। उसी तरह मनुष्य भी इशारों और ध्वनियों के माध्यम से संप्रेषण करना प्रारंभ करता है, आगे चलकर मनुष्यों ने भाषा और उसे अभिव्यक्त करने वाले संकेत-चिहनों को संप्रेषण का माध्यम बनाया। समय के साथ जैसे-जैसे तकनीकी विकास होता गया, संप्रेषण की प्रक्रिया में भी परिवर्तन होता गया और संप्र...